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तबाही के बीच \'सुपरहीरो\' बनेगा यह कीड़ा! बिना थके, बिना रुके सूंघ लेगा मौत का सामान; जानें कैसे करता है काम

March 26, 2026 807 views 1 min read
तबाही के बीच \'सुपरहीरो\' बनेगा यह कीड़ा! बिना थके, बिना रुके सूंघ लेगा मौत का सामान; जानें कैसे करता है काम
तबाही के बीच \'सुपरहीरो\' बनेगा यह कीड़ा! बिना थके, बिना रुके सूंघ लेगा मौत का सामान; जानें कैसे करता है काम

जापान के वैज्ञानिकों ने आपदा प्रबंधन की दुनिया में एक ऐसा क्रांतिकारी रोबोट बनाया है, जो मलबे में दबे लोगों की जान बचाने के लिए रेशम के कीड़े (Silkworm) की सूंघने की शक्ति का इस्तेमाल करेगा. यह रोबोट आपदा प्रभावित क्षेत्रों में मलबे के नीचे दबे लोगों की गंध पहचान कर उनकी सटीक लोकेशन बता सकता है.

रेशम के कीड़े की सूंघने की शक्ति से प्रेरणा

रेशम के कीड़े की सूंघने की शक्ति से प्रेरणा लेते हुए, जापानी वैज्ञानिकों ने इस रोबोट को विकसित किया है. रेशम के कीड़े की सूंघने की शक्ति मानव की सूंघने की शक्ति से कई गुना ज्यादा मजबूत होती है. यह कीड़ा एक छोटी सी खुशबू को सूंघने में सक्षम होता है और यह उसके लिए जान की बाजार है!

रोबोट की विशेषताएं

इस रोबोट की विशेषताएं इस प्रकार हैं:

* सूंघने की शक्ति: रोबोट में रेशम के कीड़े की सूंघने की शक्ति है, जो मानव की सूंघने की शक्ति से कई गुना ज्यादा मजबूत होती है. वह छोटी सी खुशबू को सूंघने में सक्षम होता है और यह उसके लिए जान की बाजार है!
* बिना थके बिना रुके काम कर सकता है: रोबोट बिना थके बिना रुके एकांत में मलबे के नीचे दबे लोगों की गंध पहचान कर सकता है.
* सटीक लोकेशन बता सकता है: रोबोट मलबे के नीचे दबे लोगों की सटीक लोकेशन बता सकता है, जिससे बचाव कार्यकर्ताओं को उनकी सटीक पोजीशन में पहुंचने में मदद मिलती है.
* आयाम: रोबोट का आकार क्रूज़ (क्रूज़) जैसा है, जो आसानी से मलबे के बीच में जा सकता है.

कैसे करता है काम

रोबोट इस प्रकार काम करता है:

* खोज शुरू: आपदा प्रभावित क्षेत्र में रोबोट को भेजा जाता है और वह मलबे के नीचे दबे लोगों की गंध की पहचान करने के लिए शुरू हो जाता है.
* सूंघने का काम: रोबोट में रेशम के कीड़े की सूंघने की शक्ति है, जो मानव की सूंघने की शक्ति से कई गुना ज्यादा मजबूत होती है. वह छोटी सी खुशबू को सूंघने में सक्षम होता है और यह उसके लिए जान की बाजार है!
* सटीक लोकेशन: रोबोट मलबे के नीचे दबे लोगों की सटीक लोकेशन बता सकता है, जिससे बचाव कार्यकर्ताओं को उनकी सटीक पोजीशन में पहुंचने में मदद मिलती है.