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ऑटो ट्रेकिंग .एआई पकड़ेगा खामियां:99% फाइलों को ऑनलाइन करने वाली प्रदेश की पहली संस्था, भूखंड की फाइलों में छेड़छाड़ रुकेगी

April 5, 2026 1,596 views 1 min read
ऑटो ट्रेकिंग .एआई पकड़ेगा खामियां:99% फाइलों को ऑनलाइन करने वाली प्रदेश की पहली संस्था, भूखंड की फाइलों में छेड़छाड़ रुकेगी

ऑटो ट्रेकिंग .एआई पकड़ेगा खामियां:99% फाइलों को ऑनलाइन करने वाली प्रदेश की पहली संस्था, भूखंड की फाइलों में छेड़छाड़ रुकेगी


भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा यूआईटी ने अपनी एक लाख 30 हजार छह फाइलों को ऑनलाइन कर दिया है। इसके लिए करीब 83 लाख पेज स्कैन कर दिए हैं। अब इन फाइलों के डिजिटलाइज्ड होने से किसी भी तरीके से छेड़छाड़ नहीं हो सकेगी। कलेक्टर जसमीत सिंह संधु की पहल पर यह काम हुआ है। यूआईटी सचिव आईएएस ललित गोयल ने बताया कि यह काम नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर सर्विसेज इंकॉर्पोरेटेड (NICSI) को दिया था जो भारत सरकार का उद्यम है। यह संस्था राष्ट्रीय सूचना एनआईसी के तहत तहत कार्य करता है। यूआईटी से लगातार फाइलें गायब होने की शिकायतें आती थी, इसलिए ऐसा किया गया है। डाटा सॉफ्ट कंपनी ने जो काम किया है। अब यूआईटी इसी से एक विकल्प ऐसा देगी जिसमें जनता खुद कॉलोनियों के नक्शे खोल सकेगी। इसमें यह देख सकेंगे कि भूखंड किसके नाम पर है और किसके लिए आवंटित हुआ है। इसमें जो जरूरी जानकारी हैं वे ऑनलाइन की जाएगी। यूआईटी में सबसे बड़ा मुद्दा फाइलें गायब होने का था इसी कारण यूआईटी ने यह नवाचार किया है। ^प्रदेश की पहली संस्था है जिसमें अपनी 99 प्रतिशत फाइलों को ऑनलाइन कर दिया है। इसमें करीब एक साल का समय लगा। अब फाइलें गायब होने या किसी भी तरह की छेड़छाड़ संभव नहीं है। सभी शाखा प्रभारी से प्रमाण पत्र भी ले रहे हैं। इसके बाद यदि फाइलें ऑनलाइन रहने से बची तो कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। इन सभी फाइलों को मॉर्डन रिकॉर्ड रूम में भी रखेंगे ताकि जरुरत होने पर ही निकाली जा सकेगी। -ललित गोयल, सचिव यूआईटी { कैसे: अभी यूआईटी की जो करीब सवा लाख फाइलें हैं वे अभी अलग अलग शाखा में पड़ी है। अभी कर्मचारी मनमर्जी से उन्हें काम में लेते हैं। मॉर्डन रिकॉर्ड रूम बनने के बाद ये सभी मूल फाइलें उसमें जमा होगी। इसमें एक कर्मचारी बैठेगा जो जरुरत होने पर ही फाइल बाहर निकालेगा। इसका पूरा रजिस्टर भी संधारित होगा। यह काम सेंट्रलाइज हो जाएगा। {कैसे: शहर में 18 कॉलोनियां के नक्शे अपलोड हो गए हैं। इसमें कौनसा खाली भूखंड है, कौनसा किसको आवंटित है और उसकी पूरी फाइल एक क्लिक पर खुलेगी। इसमें आजादनगर की 4837, तिलकनगर की 3977, पटेलनगर की 2852 व बापूनगर की 2844 भूखंडों की फाइलें स्कैन कर दी गई। {फायदा : किसी भी भूखंड की फाइल देखनी है तो एक क्लिक पर पूरी फाइल खुलेगी। इसमें नोटशीट के अलावा भूखंड से जुड़े पूरे दस्तावेज दिखेंगे। ऑनलाइन वेरिफिकेशन आसान होगा। रजिस्ट्री व मुआवजा विवाद कम होंगे। आवंटन से ट्रांसफर तक जानकारी रहेगी। { फायदा : अभी फाइलें नहीं मिलने, उनसे पेज गायब होने की शिकायतें रहती है। फाइलें एक जगह आने पर बाहर नहीं जाएगी तो गड़बड़ियां भी रुकेगी। इसमें जिम्मेदारी तय होगी। { फायदा : इससे तकनीकी, लीगल या फाइनेंस संबंधित जो भी खामियां है ये स्वत: ही पता चलेगी। सबसे बड़ी बात है कि इनकी ऑटो ट्रेकिंग होगी। मतलब किसी कर्मचारी ने फाइल को खोला या कुछ बदलाव किया तो आसानी से देखा जा सकेगा। {कैसे: यूआईटी के इस सिस्टम पर एआई चेटबॉक्स भी दिया है। इसमें एआई के जरिए गलतियां भी पकड़ी जा सकेगी। यदि किसी बाबू ने सर्कुलर के आधार पर गणना नहीं की या परिवादी को गलत तरीके से फायदा पहुंचाया तो तुरंत पकड़ा जा सकेगा। {कैसे: यूआईटी से जुड़ी एक लाख 30 हजार छह फाइलों के 82 लाख 64 हजार 477 पेज को स्कैन कर दिए हैं। इनमें 5686 की टेक्निकल, 83 हजार 478 रेगुलाइजेशन, 2932 भू-अवाप्ति, 5577 हाउसिंग, 2519 प्लानिंग की व 987 लीगल की फाइलें हैं। इसमें हर फाइल का बारकोड दिया है। {फायदा : यूआईटी में कई बार फाइल नहीं मिलती है। अब इसका तीन जगह रिकॉर्ड रहेगा। बाबू किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं कर सकेंगे। यदि ऐसा करेंगे तो तुरंत सिस्टम को पता लग जाएगा। डिजिटल एविडेंस में फायदा मिलेगा। री-ऑडिट आसान होगी।