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October 9, 2026
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विशाल ददलानी ने \'धुरंधर 2\' पर कसा तंज, नोटबंदी के सीन पर दी लोगों को नसीहत- जानकारी सही सोर्स से लें
भारतीय सिनेमा का एक हिस्सा ऐसा भी है जिसमें फिल्म निर्माता न केवल मनोरंजन का साधन बनाते हैं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी अपनी राय प्रस्तुत करते हैं। हाल के वर्षों में, आदित्य धर जैसे फिल्म निर्माता इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान बना चुके हैं। उनकी फिल्में अक्सर जटिल मुद्दों को छूती हैं, जैसे कि उनकी नवीनतम फिल्म 'धुरंधर 2', जो नोटबंदी के समय की कहानी को दर्शाती है। हालांकि, फिल्म ने विवाद भी खड़ा किया है, खासकर विशाल ददलानी के हालिया बयानों के बाद।
विशाल ददलानी, जो एक प्रसिद्ध गायक और गीतकार हैं, ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर आदित्य धर की फिल्म 'धुरंधर 2' को लेकर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने दो स्टोरीज में फिल्म की कुछ दृश्यों पर सवाल उठाए। ददलानी ने कहा, "जो कुछ भी दिखाया जा रहा है, वास्तविकता से अलग है। जानकारी सही सोर्स से लें।" उनके इस बयान ने फिल्म की सच्चाई और उसके प्रस्तुतिकरण पर गंभीरता से सवाल उठाए।
'धुरंधर 2' में दिखाए गए दृश्य नोटबंदी के समय की कहानी को दर्शाते हैं। ददलानी ने यह भी कहा कि फिल्म में एकाधिकार का नारा दिया गया है, जो वास्तविकता से परे है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग नोटबंदी के समय को जी चुके हैं, वे जानते हैं कि सच्चाई क्या थी। उनका यह भी कहना था कि "कुछ लोगों को लगता है कि वे जो कुछ भी दिखाते हैं, वो वास्तविकता है।" इस प्रकार, ददलानी ने फिल्म निर्माता के दृष्टिकोण को चुनौती दी।
विशाल ददलानी ने अपने एक अन्य स्टोरी में कहा कि 'धुरंधर 2' को मनोरंजन के लिए देखना चाहिए, न कि वास्तविकता को देखने के लिए। उनका कहना था कि फिल्म का उद्देश्य दर्शकों को केवल मनोरंजन प्रदान करना है, न कि उन्हें किसी राजनीतिक या सामाजिक मुद्दे के बारे में सही जानकारी देना। "यह फिल्म मनोरंजन के लिए बनाई गई है," उन्होंने कहा।
ददलानी ने यह भी जोर दिया कि "फैक्ट्स तो फैक्ट्स ही होते हैं, जानकारी सही सोर्स से लें।" यह सन्देश स्पष्ट करता है कि दर्शकों को केवल फिल्म पर भरोसा नहीं करना चाहिए, बल्कि उन्हें विभिन्न स्रोतों से जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। यह एक महत्वपूर्ण बात है, खासकर जब फिल्में समाज के ऐसे मुद्दों पर प्रकाश डालती हैं जो संवेदनशील होते हैं।
विशाल ददलानी के बयानों ने आदित्य धर की फिल्म 'धुरंधर 2' पर एक नई बहस को जन्म दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि फिल्म को मनोरंजन के दृष्टिकोण से देखना चाहिए और दर्शकों को सही जानकारी के स्रोतों पर निर्भर रहना चाहिए। इस प्रकार की बहसें भारतीय सिनेमा में महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे दर्शकों को सोचने के लिए प्रेरित करती हैं और उन्हें समाज के विभिन्न पहलुओं पर विचार करने का अवसर देती हैं।