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Shyama Prasad Mookerjee: 'राष्ट्र प्रथम था उनका जीवन मंत्र', श्यामा प्रसाद की जयंती पर गृह मंत्री ने किया याद

July 6, 2026 681 views 1 min read
Shyama Prasad Mookerjee: 'राष्ट्र प्रथम था उनका जीवन मंत्र', श्यामा प्रसाद की जयंती पर गृह मंत्री ने किया याद

श्यामा प्रसाद मुखर्जी: 'राष्ट्र प्रथम था उनका जीवन मंत्र'


श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका जीवन मंत्र 'राष्ट्र प्रथम' था। उनके योगदान को याद करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे मुखर्जी ने भारतीय राजनीति और समाज को एक नई दिशा दी। श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को हुआ था और वे भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे। उनके विचार और कार्य आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।



श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन और कार्य


श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन एक प्रेरक कहानी है। उन्होंने अपनी शिक्षा कोलकाता में पूरी की और फिर भारतीय राजनीति में कदम रखा। वे पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जिसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति और एकता को बढ़ावा देना था। मुखर्जी ने हमेशा एक मजबूत और एकजुट भारत की बात की। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में पूर्णता की आवश्यकता पर जोर दिया और इसके लिए उन्होंने 'एक देश, एक विधि' का नारा दिया।



गृह मंत्री का श्रद्धांजलि संदेश


गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संदेश में कहा, "श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपने जीवन में जो कुछ भी किया, वह केवल अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए था। उनका मानना था कि देश की भलाई सर्वोपरि है। उनके विचार और दृष्टिकोण आज भी हमारे लिए उतने ही प्रासंगिक हैं जितने तब थे।" उन्होंने आगे कहा कि मुखर्जी की जयंती पर हमें उनके विचारों को आत्मसात करने और उनके सिद्धांतों के अनुसार कार्य करने की आवश्यकता है।



मुखर्जी की विचारधारा


श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विचारधारा में भारतीयता, राष्ट्रीयता और सांस्कृतिक एकता का प्रमुख स्थान था। उन्होंने हमेशा यह कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता में है, लेकिन इसे एकता में बदलने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, एकता के बिना कोई भी राष्ट्र मजबूत नहीं हो सकता। उन्होंने भारतीय संस्कृति और परंपराओं को सहेजने के लिए कई प्रयास किए।



समाज में मुखर्जी का योगदान


मुखर्जी ने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कई शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना की, जिससे युवाओं को शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला। उनका मानना था कि शिक्षा से ही समाज में परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए भी कई योजनाएं बनाई और उनका समर्थन किया।



आधुनिक भारत में मुखर्जी का महत्व


आज के भारत में श्याम प्रसाद मुखर्जी की विचारधारा और उनके सिद्धांतों की अधिक आवश्यकता है। उनकी सोच ने न केवल भारतीय राजनीति को आकार दिया, बल्कि समाज के हर वर्ग को एकजुट करने का काम किया। उनकी जयंती पर, समाज के सभी वर्गों को उनके विचारों को अपनाने और उन्हें आगे बढ़ाने का संकल्प लेना चाहिए।



युवाओं के लिए प्रेरणा


श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन युवाओं के लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने यह साबित किया कि एक व्यक्ति अपनी मेहनत और लगन से किसी भी चुनौती का सामना कर सकता है। उनकी सोच और दृष्टिकोण आज के युवाओं को यह सिखाते हैं कि वे अपने देश के प्रति जिम्मेदार बनें और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करें।



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इस प्रकार, श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर हमें उनके जीवन और कार्यों को याद करने के साथ-साथ उनके सिद्धांतों को अपनाने की आवश्यकता है। यह केवल एक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि एक संकल्प है कि हम उनके दिखाए मार्ग पर चलकर अपने देश को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे।