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साधु ने बताया भाग्य का सूत्र, जिसने समझा, उसका बदल गया जीवन
मनुष्य के भाग्य में जो भी धन, वैभव, संपत्ति, जीवनसाथी, संतान आदि मिलना लिखा है, वह तो उसे मिलकर ही रहता है, कोई उसे रोक नहीं सकता, इसलिए मनुष्य को न ही कोई पछतावा, न ही कोई अचरज करना चाहिए, बस निरंतर कर्म करते रहना चाहिए, सही दिशा में कर्म भाग्य को गतिमान करता है।