Science
Henri Kagan wins Nobel Prize at 95: Check out his contributions to chemistry and pharmacy
October 9, 2026
2,834 views
मौत को अक्सर अंतिम पड़ाव माना जाता है, लेकिन विज्ञान इसे एक बदलाव के रूप में देखता है. नील डीग्रास टायसन के अनुसार, इंसान का शरीर ऊर्जा का स्रोत है, जो मृत्यु के बाद भी खत्म नहीं होता, बल्कि अपना रूप बदल लेता है. दफनाने पर यह ऊर्जा मिट्टी में मिलकर पेड़-पौधों के जरिए फिर जीवन का हिस्सा बनती है, जबकि दाह संस्कार में यह गर्मी के रूप में अंतरिक्ष में फैल जाती है. वैज्ञानिक सिद्धांत भी यही कहते हैं कि ऊर्जा और परमाणु कभी नष्ट नहीं होते, वे केवल रूप बदलते हैं. इस तरह देखा जाए तो मृत्यु अंत नहीं, बल्कि प्रकृति के चक्र में एक नई शुरुआत है.