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Navratri 2026 Kanya Pujan: अष्टमी-नवमी कन्या पूजन में कितनी कन्याएं होनी चाहिए? 5,7 या 9 जानें संख्या और सही उम्र

March 25, 2026 989 views 1 min read
Navratri 2026 Kanya Pujan: अष्टमी-नवमी कन्या पूजन में कितनी कन्याएं होनी चाहिए? 5,7 या 9 जानें संख्या और सही उम्र
नवरात्रि के भाग्यशाली कन्या पूजन: अष्टमी-नवमी कन्या पूजन में कितनी कन्याएं होनी चाहिए?

नवरात्रि का महत्व

हिंदू धर्म में नवरात्रि एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसे देवी दुर्गा के नौ अवतारों का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है। इसमें 9 दिनों तक देवी दुर्गा की पूजा की जाती है, जिसमें अष्टमी और नवमी को विशेष महत्व दिया जाता है। इन दो दिनों को कन्या पूजन के रूप में जाना जाता है, जहां कन्याओं को मां का स्वरूप मानकर उनका सम्मान किया जाता है।

अष्टमी और नवमी कन्या पूजन का महत्व

अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इस दौरान देवी दुर्गा की अष्टमी और नवमी अवतार का पूजन किया जाता है। इसे मां की स्वरूप के रूप में माना जाता है, जहां कन्याओं को भोजन कराने की परंपरा है। आमतौर पर यह परंपरा हलवा, पूड़ी और चने के भोजन के साथ जुड़ी होती है।

अष्टमी-नवमी कन्या पूजन में कितनी कन्याएं होनी चाहिए?

अब सवाल यह है कि अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन में कितनी कन्याएं होनी चाहिए? यह एक पारंपरिक प्रश्न है, जिसका उत्तर विभिन्न शास्त्रों और परंपराओं में विभिन्न हो सकता है। कुछ लोगों का मानना है कि अष्टमी और नवमी के दिन 5,7 या 9 कन्याएं होनी चाहिए, लेकिन इसके पीछे के कारण क्या हैं? आइए इसके पीछे के कारणों को समझते हैं।

पांच कन्याएं

कुछ लोगों का मानना है कि अष्टमी और नवमी के दिन 5 कन्याएं होनी चाहिए। इसके पीछे का कारण यह है कि 5 एक पूर्ण संख्या है, जो समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक है। इन पांच कन्याओं को मां के पांच तत्वों - पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश का प्रतीक माना जाता है। पृथ्वी पर जीवन को नियंत्रित करने के लिए पृथ्वी तत्व का महत्व है, जल तत्व जल को प्रतिनिधित्व करता है, अग्नि तत्व जीवन को प्रज्वलित करने के लिए महत्वपूर्ण है, वायु तत्व जीवन को सांस देता है, और आकाश तत्व जीवन को आकाशीय ऊर्जा प्रदान करता है।

सात कन्याएं

कुछ लोगों का मानना है कि अष्टमी और नवमी के दिन 7 कन्याएं होनी चाहिए। इसके पीछे का कारण यह है कि 7 एक पवित्र संख्या है, जो सातत्व का प्रतीक है। सातत्व को स्वस्थता, संतुलन और सौख्य का प्रतीक माना जाता है। इन सात कन्याओं को मां के सात गुणों - सात्त्विक, राजगुण, तमोगुण, रजोगुण, सतोगुण, बुद्धि और अहंकार का प्रतीक माना जाता है।

नौ कन्याएं

कुछ लोगों का मानना है कि अष्टमी और नवमी के दिन 9 कन्याएं होनी चाहिए। इसके पीछे का कारण यह है कि 9 एक विशेष संख्या है, जो शक्ति और समृद्धि का प्रतीक है। इन नौ कन्याओं को मां के नौ रूपों - शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुशमनासिनी, स्कंदमाता ,कैट्यक्षी , कात्यायनी, महागौरी और कालरात्रि का प्रतीक माना जाता है।

कन्याओं की उम्र

अष्टमी और नवमी के दिन कन्याओं की उम्र भी एक महत्वपूर्ण बात है। आमतौर पर कन्याओं की उम्र 5-12 वर्ष के बीच होनी चाहिए। इसके पीछे का कारण यह है कि ये उम्र की कन्याएं अभी बच्चों की तरह होती हैं, जो मां के चरणों में होती हैं। यह उम्र का चयन केवल पारंपरिक परंपराओं पर आधारित नहीं है, बल्कि यह बच्चों की शारीरिक और मानसिक विकास को भी दर्शाता है।

निष्कर्ष

अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन में कन्याओं की संख्या और उम्र एक महत्वपूर्ण विषय है। यह पारंपरिक परंपराओं और शास्त्रों के अनुसार होता है। 5, 7 और 9 कन्याएं होनी चाहिए और उनकी उम्र 5-12 वर्ष के बीच होनी चाहिए। यह परंपरा मां के चरणों में कन्याओं का सम्मान करने का एक तरीका है, जो जीवन में संतुलन और समृद्धि लाने का प्रतीक है।