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ईरान दागता है मिसाइल और कुछ ही सेकंड में सुरक्षित हो जाते हैं इजरायली! आयरन डोम नहीं ये है इजरायल का असली \'मास्टरमाइंड\'

March 25, 2026 448 views 1 min read
ईरान दागता है मिसाइल और कुछ ही सेकंड में सुरक्षित हो जाते हैं इजरायली! आयरन डोम नहीं ये है इजरायल का असली \'मास्टरमाइंड\'
ईरान-इजरायल विवाद: आयरन डोम के बिना इजरायल का एक महीन रक्षक है जो बचा रहा है देश को

मध्य पूर्व में वर्षों से चली आ रही ईरान-इजरायल की जंग में हाल ही में आयरन डोम की तकनीक ने सुर्खियों में आकर अपनी जगह बनाई है. लेकिन यह तकनीक इजरायल की रक्षा प्रणाली का केवल एक पहलू है और दुनिया के दृष्टिकोण को एक और हिस्सा छुपा रहा है- इजरायल का एक शांति से काम करने वाला रक्षक. जब ईरान से निकलने वाली मिसाइलें इजरायल की ओर बढ़ती हैं तब एक सायरन की आवाज़ से पूरी बाजी पलट जाती है और सड़कों पर से लोग अपने जान बचाने के लिए घरों में जाकर छुप जाते हैं। इस सायरन की आवाज़ ही इजरायल के एक शांति से काम करने वाले रक्षक की पहचान है जो ईरान की मिसाइलों को उस समय नष्ट करता है जब वे इजरायल की सीमा के करीब पहुंच ही रही होती हैं।

आयरन डोम क्या है और कैसे काम करता है

आयरन डोम की तकनीक का उपयोग इजरायल अपनी रक्षा के लिए करता है और यह एक ऐसी तकनीक है जो वायु रक्षा प्रणाली को बढ़ावा देती है। यह तकनीक विश्व की सबसे उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों में से एक है जो कि हाइब्रिड प्रणाली पर काम करती है। आयरन डोम की सुरक्षा की विशेषता यह है कि यह तीनों स्तरों पर काम करता है जैसे कि हवा से हवा में मिसाइल को नष्ट करना, जमीन से हवा में मिसाइल को नष्ट करना और जमीन से जमीन में काम करना यानि एक प्रकार के भूमि रक्षा प्रणाली पर काम करता है। यह तकनीक अत्याधुनिक है और अपने समय की सबसे उन्नत तकनीक है।

इसे बनाने वाली कंपनी राफेल का कहना है कि यह तकनीक विश्व की सबसे एडवांस तकनीक है और उसके बाद कोई और तकनीक नहीं है। इसका काम एक समतल बिंदु पर स्थित एक जाल के रूप में होता है जो पर्याप्त दूरी से विमान को नष्ट करने की क्षमता रखता है। इस तकनीक के माध्यम से वायु रक्षा प्रणाली को बढ़ावा दिया जा सकता है और मिसाइल की गति को धीमा किया जा सकता है। आयरन डोम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह एक हाइब्रिड सिस्टम है जो कि तीनों स्तरों पर काम करता है और जिसमें हवा से हवा में मिसाइल को नष्ट करने के लिए प्रक्षेपास्त्र (रॉकेट) और जमीन से हवा में मिसाइल को नष्ट करने के लिए प्रक्षेपास्त्र (लॉन्ग रेंज मिसाइल) और जमीन से जमीन में मिसाइल को नष्ट करने के लिए प्रक्षेपास्त्र (मिसाइल डिफेंसिसिस्ट) का उपयोग किया जाता है।

आयरन डोम के पीछे भारत का हाथ

आयरन डोम के पीछे भारत का हाथ है। भारत की कंपनी बीएल ऐच के सहयोग से ही इजरायल के रक्षा मंत्रालय ने यह तकनीक विकसित की है। भारत के रक्षा मंत्रालय को बताया गया कि यह तकनीक विश्व की सबसे उन्नत तकनीक है। इसे बनाने में भारत की कंपनी बीएल ऐच ने इजरायल के रक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर अपनी बेस्ट टीम का काम किया है। इसे बनाने के लिए भारतीय टीम ने इजरायल के साथ मिलकर काम किया है।

मिसाइल रक्षा प्रणाली का एक प्रकार है जो कि किसी भी देश की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब कोई देश किसी विदेशी हमले से बचाव के लिए मिसाइल रक्षा प्रणाली का सहारा लेता है, तो वह प्रणाली उसकी रक्षा के लिए आवश्यक होती है। इस प्रणाली का उपयोग करके किसी भी मिसाइल को पहचाना जा सकता है और उसे नष्ट किया जा सकता है। इसे नष्ट करने के लिए विभिन्न प्रकार के तंत्र होते हैं, जैसे कि रॉकेट, ट्रिपल इन्फैंट्री, लाइट वीइकल और स्पेस बॉन्ड। मिसाइल रक्षा प्रणाली का उपयोग करके किसी भी देश की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सकता है।

भारत की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है मिसाइल रक्षा प्रणाली

भारत की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है मिसाइल रक्षा प्रणाली। भारत के देश की सुरक्षा के लिए यह प्रणाली आवश्यक है। भारत के रक्षा मंत्रालय ने भी इसे बहुत महत्वपूर्ण माना है और उसने इसे विकसित करने के लिए करोड़ों का बजट आवंटित किया है। इस प्रणाली का उपयोग करके भारत की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सकता है और भारत को विदेशी हमले से बचाया जा सकता है। भारत के साथ-साथ दूसरे देसों के लिए भी यह प्रणाली उपयोगी हो सकती है।

इजरायल की रक्षा में आयरन डोम की भूमिका

इजरायल की रक्षा में आयरन डोम की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। इजरायल की रक्षा के लिए यह प्रणाली आवश्यक है। इजरायल के रक्षा मंत्रालय ने भी इसे बहुत महत्वपूर्ण माना है और उसने इसे विकसित करने के लिए करोड़ों का बजट आवंटित किया है। इस प्रणाली का उपयोग करके इजरायल की रक्षा को सुनिश्चित किया जा सकता है और इजराइल को विदेशी हमले से बचाया जा सकता है।

निष्कर्ष

आयरन डोम की तकनीक दुनिया में एक विशेष प्रकार की रक्षा प्रणाली है जो कि अपने समय की सबसे उन्नत तकनीक है। यह तकनीक इजरायल की रक्षा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो कि ईरान से निकलने वाली मिसाइलों को नष्ट करती है। इसके अलावा, भारत के रक्षा मंत्रालय ने भी इस तकनीक को महत्व दिया है और इसे विकसित करने के लिए बजट आवंटित किया है। इस तकनीक का उपयोग करके किसी भी देश की रक्षा सुनिश्चित की जा सकती है और विदेशी हमले से बचाया जा सकता है।