घर रोशन करने वाली लाइटें ही आपकी जिंदगी में ला रहीं अंधेरा, जानें इनसे कैसे हो रहा कैंसर?
February 15, 2026
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रात में जगमगाती स्ट्रीट लाइट्स, एलईडी स्क्रीन और मोबाइल की नीली रोशनी भले ही आधुनिक जीवन का हिस्सा बन चुकी हो. लेकिन कई रिसर्च बताती है कि यह कृत्रिम रोशनी सेहत के लिए खतरा बन सकती है. दरअसल कई इंटरनेशनल रिसर्च में सामने आया है कि रात के समय आर्टिफिशियल लाइट्स के संपर्क में रहना कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि घर रोशन करने वाली लाइट ही आपकी जिंदगी में अंधेरा कैसे ला रही है और इससे कैसे कैंसर हो रहा है?मेलाटोनिन पर असर, बढ़ सकता है ट्यूमरअमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायरनमेंटल हेल्थ साइंसेज की ओर से की गई रिसर्च में पाया गया है कि रात में कृत्रिम रोशनी के संपर्क में शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर दब जाता है. यही हार्मोन नींद और शरीर की जैविक घड़ी को नियंत्रित करता है और इसमें ट्यूमर रोधी गुण भी होते है. रिसर्च में यह भी देखा गया है कि जिन महिलाओं की नींद के दौरान रोशनी से दिक्कत हुई है, उनके ब्लड में कैंसर रोधी क्षमता कम हो गई है. वहीं पूरे अंधेरे में सोने वालों के ब्लड ने पशु मॉडल में ट्यूमर की वृद्धि को धीमा किया है. यह रिसर्च 2005 में जर्नल कैंसर रिसर्च में प्रकाशित हुई थी.एलईडी की नीली रोशनी भी खतरे की वजहवहीं ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर और बार्सिलोना इंस्टीट्यूट ऑफ ग्लोबल हेल्थ के रिसर्चर ने मैड्रिड और बार्सिलोना में करीब 4000 लोगों पर रिसर्च किया. इसमें पाया गया की एलईडी से निकलने वाली नीली रोशनी के ज्यादा संपर्क में रहने वालों में ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर का खतरा लगभग डेढ़ गुना तक बढ़ सकता है. इस रिसर्च में शामिल रिसर्चर के अनुसार नीली रोशनी शरीर की सर्केडियन रिदम यानी जैविक घड़ी को बिगाड़ती है, जिससे हार्मोनल असंतुलन हो सकता है.रात की पाली में काम करना भी खतरनाकइंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर ने पहले ही रात की शिफ्ट में काम को संभावित कैंसर खतरों की कैटेगरी में रखा है. रिसर्च बताती है कि रात में रोशनी के कारण मेलाटोनिन का दमन होता है और एस्ट्रोजन एक्टिविटी को प्रभावित कर सकता है. 2016 के एक ग्लोबल रिसर्च में 158 देश के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया. इसमें पाया गया कि जहां रात में कृत्रिम रोशनी ज्यादा है, वहां कुल कैंसर दर और फेफड़े, ब्रेस्ट, कोलोरेक्टल और प्रोस्टेट कैंसर के मामले ज्यादा पाए गए है. इसके अलावा एक रिसर्च के अनुसार ज्यादा कृत्रिम रोशनी वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में थाॅयराइड कैंसर का खतरा भी ज्यादा पाया गया है.कैसे करें बचाव?एक्सपर्ट्स बताते हैं कि आधुनिक जीवन में रोशनी से पूरी तरह बचाना संभव नहीं है. लेकिन कुछ सावधानियां खतरा कम कर सकती है. जैसे रात में हल्की रोशनी का इस्तेमाल करना, मोबाइल और स्क्रीन का सीमित उपयोग करना, ब्लू लाइट या फिल्टर नाइट मोड का प्रयोग और सोते समय कमरे में अंधेरा रखना मददगार साबित हो सकता है.ये भी पढ़ें-2050 तक चार में से एक शख्स के कान में होंगी दिक्कतें, डरा देगी WHO की यह रिपोर्टDisclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.