चीनी स्मार्टफोन कंपनियों की बज गई \'घंटी\': भारत में पहली बार मांग में आई ऐतिहासिक गिरावट, जानें क्यों छिड़ा ये \'महायुद्ध\'
नई दिल्ली: भारत, दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार, हमेशा से विदेशी तकनीक कंपनियों के लिए एक सोने की खान रहा है। विशेषकर, चीनी स्मार्टफोन निर्माताओं ने पिछले कुछ वर्षों में इस बाजार पर अपना परचम लहराया है। Xiaomi, Samsung (हालांकि यह दक्षिण कोरियाई है, लेकिन भारतीय बाजार में चीनी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करती है), Vivo, Realme, और Oppo जैसी कंपनियों ने अपनी आक्रामक मूल्य निर्धारण, व्यापक वितरण नेटवर्क और निरंतर नवाचार के माध्यम से लाखों भारतीयों के दिलों और जेबों पर कब्जा किया है। लेकिन, हाल के आंकड़ों ने एक चौंकाने वाला संकेत दिया है: पहली बार, चीनी स्मार्टफोन कंपनियों की मांग में गिरावट देखी गई है। यह सिर्फ एक अस्थायी झटका नहीं है; यह एक ऐसे ट्रेंड का शुरुआती बिंदु हो सकता है जो भारतीय स्मार्टफोन परिदृश्य को हमेशा के लिए बदल सकता है।
यह गिरावट, जो अब तक के इतिहास में अभूतपूर्व है, न केवल इन बहुराष्ट्रीय निगमों के राजस्व पर असर डाल रही है, बल्कि यह भारत की अपनी \'मेक इन इंडिया\' पहल और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के विकास के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत का भी संकेत दे सकती है। आखिर क्या कारण हैं कि एक बार जिस बाजार में चीनी कंपनियों का सिक्का चलता था, अब वहां उनकी तूती बोलनी बंद हो गई है? इस लंबी पड़ताल में, हम इस गिरावट के पीछे की गहराइयों में उतरेंगे, इसके कारणों का विश्लेषण करेंगे, इसमें शामिल हितधारकों पर प्रकाश डालेंगे, और यह समझने की कोशिश करेंगे कि भारत के स्मार्टफोन भविष्य के लिए इसके क्या मायने हैं।
गहराई में उतरें: पृष्ठभूमि और संदर्भ
भारतीय स्मार्टफोन बाजार की वृद्धि पिछले दशक में असाधारण रही है। 2010 के दशक की शुरुआत में, फीचर फोन का दबदबा था, लेकिन 4G के आगमन, डेटा की गिरती कीमतों और किफायती स्मार्टफोन की उपलब्धता ने एक डिजिटल क्रांति को जन्म दिया। इसी समय, चीनी स्मार्टफोन निर्माताओं ने बाजार में प्रवेश किया, और उन्होंने अपनी रणनीति को एकदम सटीक तरीके से रचा।
* सस्ते दाम, बेहतर फीचर्स: चीनी कंपनियों ने पारंपरिक रूप से भारतीय बाजार में उन स्मार्टफोनों को पेश किया जो वैश्विक स्तर पर महंगे थे, लेकिन वे उन्हें काफी कम कीमतों पर उपलब्ध करा रहे थे। बढ़िया कैमरे, बड़ी बैटरी, और तेज प्रोसेसर - ये सब भारतीयों के लिए एक लुभावने पैकेज का हिस्सा थे।
* ऑनलाइन बिक्री का लाभ: शुरू में, इन कंपनियों ने प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसे Flipkart और Amazon पर ध्यान केंद्रित किया। फ्लैश सेल की रणनीति ने उपभोक्ताओं के बीच एक \'हाइप\' पैदा की और तुरंत बिक्री बढ़ाने में मदद की।
* स्थानीयकरण की रणनीति: चीनी ब्रांडों ने न केवल फोन बेचे, बल्कि उन्होंने स्थानीय स्वाद और जरूरतों को भी समझा। उन्होंने भारतीय भाषाओं के समर्थन, ड्यूल-सिम क्षमता, और स्थानीय ऐप्स के साथ अपने फोन को अनुकूलित किया।
* विशाल विपणन अभियान: बड़े बजट के विपणन अभियान, जिसमें बॉलीवुड सितारों के समर्थन और आक्रामक ऑनलाइन विज्ञापन शामिल थे, ने इन ब्रांडों को भारतीय उपभोक्ताओं के दिमाग में गहराई से स्थापित कर दिया।
इस रणनीति का परिणाम स्पष्ट था: 2015-16 तक, चीनी ब्रांडों ने सैमसंग जैसी स्थापित कंपनियों को पीछे छोड़ते हुए भारतीय स्मार्टफोन बाजार में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी हासिल कर ली। Xiaomi, Vivo, Oppo, और Realme जल्द ही शीर्ष 5 ब्रांडों में शामिल हो गए, अक्सर संयुक्त रूप से 60% से अधिक बाजार हिस्सेदारी पर कब्जा कर लेते थे।
बहुआयामी विश्लेषण: यह क्यों मायने रखता है और इसमें कौन से हितधारक शामिल हैं?
चीनी स्मार्टफोन की मांग में यह गिरावट सिर्फ एक बाजार की खबर नहीं है; इसके दूरगामी आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक निहितार्थ हैं। यह भारत की डिजिटल महत्वाकांक्षाओं, राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं और आत्मनिर्भरता के लक्ष्यों के साथ सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
यह क्यों मायने रखता है:
1. आर्थिक प्रभाव:
* राजस्व में कमी: स्मार्टफोन की बिक्री में गिरावट सीधे तौर पर कंपनियों के राजस्व को प्रभावित करती है। चीनी कंपनियों के लिए, भारत एक प्रमुख राजस्व स्रोत रहा है, और इस गिरावट का उनके वैश्विक वित्तीय प्रदर्शन पर भी असर पड़ सकता है।
* रोजगार पर असर: बड़ी बिक्री के साथ-साथ उत्पादन, वितरण, विपणन और खुदरा क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी जुड़े होते हैं। बिक्री में गिरावट से इन क्षेत्रों में रोजगार सृजन धीमा हो सकता है या नौकरियों में कमी आ सकती है।
* सरकारी राजस्व: आयात शुल्क, जीएसटी और अन्य करों के रूप में सरकार को प्राप्त होने वाले राजस्व में भी कमी आएगी।
* निवेश का प्रवाह: यदि मांग लगातार गिरती रहती है, तो नई निवेश योजनाओं या मौजूदा उत्पादन इकाइयों के विस्तार पर भी रोक लग सकती है।
2. रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा महत्व:
* डेटा सुरक्षा और गोपनीयता: चीनी स्मार्टफोन अक्सर डेटा सुरक्षा और गोपनीयता संबंधी चिंताओं के चलते जांच के दायरे में रहे हैं। भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर कई चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया है। स्मार्टफोन में संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा होता है, और इस पर चीनी कंपनियों का प्रभुत्व चिंता का विषय रहा है।
* तकनीकी निर्भरता: भारतीय बाजार में चीनी स्मार्टफोन का अत्यधिक प्रभुत्व देश की तकनीकी निर्भरता को बढ़ाता है। यह आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान या भू-राजनीतिक तनाव के समय जोखिम पैदा कर सकता है।
* \'मेक इन इंडिया\' को बढ़ावा: इस गिरावट का मतलब है कि भारतीय उपभोक्ताओं की पसंद में बदलाव आ रहा है, जो घरेलू विनिर्माण और ब्रांडों के लिए एक अवसर पैदा करता है। यह \'मेक इन इंडिया\' पहल को एक नई गति दे सकता है।
3. उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव:
* सचेत उपभोक्ता: भारतीय उपभोक्ता अब पहले से कहीं अधिक सूचित और सचेत हो गए हैं। वे न केवल कीमत और फीचर्स पर, बल्कि ब्रांड की प्रतिष्ठा, गुणवत्ता, बिक्री के बाद की सेवा और राष्ट्रीयता पर भी विचार कर रहे हैं।
* स्थानीय ब्रांडों का उदय: इस स्थिति ने भारतीय ब्रांडों जैसे Lava, Micromax, और Candy (जो अब भारतीय स्वामित्व वाली है) के लिए एक नया अवसर खोला है। उपभोक्ताओं का ध्यान अब इन स्थानीय विकल्पों की ओर भी जा रहा है।
* विश्वसनीयता और विश्वास: पिछले कुछ वर्षों में, कुछ चीनी ब्रांडों के उत्पादों की गुणवत्ता, सॉफ्टवेयर अपडेट में देरी, या बिक्री के बाद की खराब सेवाओं को लेकर शिकायतें बढ़ी हैं, जिससे उपभोक्ताओं का विश्वास कम हुआ है।
इसमें शामिल हितधारक:
* चीनी स्मार्टफोन निर्माता: Xiaomi, Vivo, Oppo, Realme, OnePlus (Oppo के स्वामित्व में), iQOO (Vivo के स्वामित्व में), Honor।
* भारतीय स्मार्टफोन निर्माता: Lava, Micromax, Karbonn (हाल ही में इसने नए सिरे से बाजार में वापसी की कोशिश की है), Candy।
* अन्य वैश्विक ब्रांड: Samsung (दक्षिण कोरियाई, लेकिन भारतीय बाजार में प्रमुख खिलाड़ी), Apple (अमेरिकी, प्रीमियम सेगमेंट पर केंद्रित)।
* भारतीय सरकार: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, वित्त मंत्रालय।
* उपभोक्ता: सभी आय वर्ग के भारतीय स्मार्टफोन उपयोगकर्ता।
* वितरक और खुदरा विक्रेता: ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म (Amazon, Flipkart) और भौतिक स्टोर।
* घटक आपूर्तिकर्ता: डिस्प्ले, चिपसेट, बैटरी आदि बनाने वाली कंपनियां।
* दूरसंचार ऑपरेटर: जो डेटा प्लान के साथ बंडल ऑफर पेश करते हैं।
कालानुक्रमिक घटनाएँ और विस्तृत विश्लेषण: गिरावट के पीछे की परतें
यह गिरावट अचानक नहीं आई है; यह कई कारकों का एक जटिल जाल है जो धीरे-धीरे बुना गया है। आइए उन प्रमुख घटनाओं और प्रवृत्तियों को देखें जिन्होंने इस स्थिति को जन्म दिया है:
1. भू-राजनीतिक तनाव और राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंताएं:
* 2020 भारत-चीन सीमा संघर्ष: गैलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प ने दोनों देशों के बीच संबंधों में एक महत्वपूर्ण गिरावट ला दी। इसके तुरंत बाद, भारत में चीनी उत्पादों के बहिष्कार की एक मजबूत लहर चली।
* चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध: भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर कई चीनी ऐप्स (जैसे TikTok, PUBG, WeChat, आदि) पर प्रतिबंध लगा दिया। इस कार्रवाई ने उपभोक्ताओं के मन में चीनी प्रौद्योगिकी कंपनियों की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगा दिया।
* चीनी कंपनियों की जांच: प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नियमों के उल्लंघन, कर चोरी, और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों के चलते कई चीनी स्मार्टफोन निर्माताओं के खिलाफ भारतीय प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य एजेंसियों द्वारा जांच शुरू की गई। इन जांचों ने कंपनियों की प्रतिष्ठा को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया।
2. \'मेक इन इंडिया\' और उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना:
* घरेलू विनिर्माण पर जोर: भारत सरकार ने \'मेक इन इंडिया\' पहल के तहत देश में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई नीतियां बनाईं।
* PLI योजना का शुभारंभ: 2020 में, स्मार्टफोन सहित इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (PLI) योजना शुरू की गई। इस योजना का उद्देश्य घरेलू उत्पादन बढ़ाना, निर्यात को प्रोत्साहित करना और आयात पर निर्भरता कम करना था।
* लाभ का मिलना: इस योजना ने Samsung, Apple (अपने कुछ आपूर्तिकर्ताओं के माध्यम से), और कुछ हद तक Xiaomi, Oppo, Vivo जैसी कंपनियों को भारत में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। हालांकि, इसका पूरा लाभ अभी भी दिखना बाकी है, लेकिन इसने घरेलू विनिर्माण के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है।
3. उपभोक्ता भावना में बदलाव और \'बाय इंडियन\' आंदोलन:
* राष्ट्रवाद और स्थानीयता: भू-राजनीतिक तनावों ने उपभोक्ताओं के बीच \'बाय इंडियन\' (भारतीय खरीदें) की भावना को मजबूत किया। कई उपभोक्ता अब अपने खरीद निर्णयों में राष्ट्रीय गौरव को एक महत्वपूर्ण कारक के रूप में देख रहे हैं।
* गुणवत्ता और मूल्य पर अधिक ध्यान: जबकि चीनी ब्रांडों ने शुरुआत में कीमत पर ध्यान केंद्रित किया था, उपभोक्ता अब अधिक परिपक्व हो गए हैं। वे गुणवत्ता, टिकाऊपन, सॉफ्टवेयर अपडेट की नियमितता, और बिक्री के बाद की बेहतर सेवा को प्राथमिकता दे रहे हैं।
* भारतीय ब्रांडों का पुनरुत्थान: Lava, Micromax, और Karbonn जैसी भारतीय कंपनियों ने इस अवसर को भुनाने के लिए नए और बेहतर मॉडल लॉन्च किए हैं। उन्होंने अपनी मार्केटिंग रणनीतियों को भी बदला है और राष्ट्रीयता पर जोर दिया है।
4. आपूर्ति श्रृंखला के मुद्दे और बढ़ती लागत:
* वैश्विक चिपसेट की कमी: COVID-19 महामारी के कारण वैश्विक चिपसेट आपूर्ति श्रृंखला में गंभीर व्यवधान आया। इससे स्मार्टफोन उत्पादन प्रभावित हुआ और कीमतों में वृद्धि हुई।
* घटकों के आयात पर निर्भरता: भले ही फोन भारत में असेंबल किए जा रहे हों, लेकिन कई महत्वपूर्ण घटक (जैसे चिपसेट, डिस्प्ले पैनल, कैमरा मॉड्यूल) अभी भी आयात किए जाते हैं। इन पर निर्भरता लागत को बढ़ाती है।
* बढ़ते आयात शुल्क: सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक घटकों और तैयार उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाया है, जिसका अंतिम बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।
5. चीनी कंपनियों द्वारा मूल्य निर्धारण में आक्रामकता में कमी:
* लाभ मार्जिन पर दबाव: बढ़ती लागत, जांच, और प्रतिस्पर्धी दबावों के कारण, चीनी कंपनियां अपने लाभ मार्जिन पर दबाव महसूस कर रही हैं। इसका मतलब है कि वे पहले की तरह आक्रामक मूल्य निर्धारण रणनीति नहीं अपना पा रही हैं।
* स्थानीय उत्पादन की लागत: हालांकि PLI योजनाएं मदद कर रही हैं, लेकिन शुरुआत में स्थानीय उत्पादन की लागत आयातित भागों पर निर्भरता के कारण अधिक हो सकती है।
* कम छूट और ऑफर: फ्लैश सेल और भारी छूट जो पहले इन कंपनियों की पहचान थी, अब कम हो गई है।
6. डेटा गोपनीयता और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का बढ़ना:
* लगातार संदेह: चीनी स्मार्टफोन की डेटा गोपनीयता और सुरक्षा को लेकर चिंताएं कभी पूरी तरह से दूर नहीं हुईं। कई रिपोर्टों और लीक ने इन चिंताओं को और बढ़ाया है।
* सरकारी निगरानी: सरकार डेटा की सुरक्षा को लेकर अधिक सतर्क हो गई है, और यह भी एक कारण हो सकता है कि वे चीनी उपकरणों पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं।
7. बिक्री के बाद की सेवाओं में विसंगतियां:
* सेवा केंद्रों की कमी: कुछ चीनी ब्रांडों के पास एक व्यापक और विश्वसनीय बिक्री के बाद सेवा नेटवर्क नहीं है, खासकर छोटे शहरों और कस्बों में।
* मरम्मत की लागत और समय: वारंटी अवधि के बाद मरम्मत की उच्च लागत या लंबा इंतजार भी उपभोक्ताओं को निराश करता है।
भविष्य का परिदृश्य और निहितार्थ: एक नया अध्याय?
चीनी स्मार्टफोन कंपनियों की मांग में यह गिरावट भारतीय स्मार्टफोन बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। इसके भविष्य के लिए कई महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं:
1. घरेलू ब्रांडों का पुनरुद्धार:
* लवा, माइक्रोमैक्स, कार्बोन जैसी कंपनियों को अवसर: यह भारतीय ब्रांडों के लिए एक सुनहरा मौका है। यदि वे गुणवत्ता, नवाचार, और ग्राहक सेवा में सुधार करते हैं, तो वे चीनी ब्रांडों से बाजार हिस्सेदारी छीन सकते हैं।
* \"मेड इन इंडिया\" का बढ़ता महत्व: उपभोक्ता अब \"मेड इन इंडिया\" उत्पादों को प्राथमिकता देने के लिए तैयार हैं, और यह घरेलू कंपनियों के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है।
2. चीनी कंपनियों के लिए रणनीति में बदलाव की आवश्यकता:
* स्थानीयकरण का गहन चरण: चीनी कंपनियों को केवल भारत में उत्पादन बढ़ाने से आगे बढ़कर, अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश करने, स्थानीय प्रतिभाओं को काम पर रखने, और वास्तविक \"भारतीय\" उत्पादों को डिजाइन करने की आवश्यकता होगी।
* विश्वास का पुनर्निर्माण: उन्हें डेटा सुरक्षा और गोपनीयता संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए अधिक पारदर्शी होने की आवश्यकता होगी।
* बिक्री के बाद की सेवाओं में निवेश: एक मजबूत और विश्वसनीय सेवा नेटवर्क का निर्माण उनकी प्रतिष्ठा को बेहतर बनाने में मदद करेगा।
* रणनीतिक साझेदारी: वे भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी पर भी विचार कर सकते हैं।
3. प्रीमियम सेगमेंट का बढ़ता प्रभाव:
* Apple की बढ़ती हिस्सेदारी: इस बीच, Apple जैसे प्रीमियम ब्रांडों ने भारतीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है, खासकर जब उपभोक्ता लंबी अवधि के निवेश और बेहतर अनुभव की तलाश में हैं।
* सैमसंग का मजबूत गढ़: Samsung, अपनी स्थानीय उत्पादन क्षमताओं और व्यापक वितरण के साथ, एक मजबूत खिलाड़ी बना रहेगा, खासकर मध्यम-से-उच्च सेगमेंट में।
4. इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण हब बनने की ओर भारत:
* PLI योजना का बढ़ता महत्व: यदि PLI योजनाएं सफलतापूर्वक लागू होती हैं, तो भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए एक प्रमुख केंद्र बन सकता है, जिसमें स्मार्टफोन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
* घटकों का स्थानीयकरण: सरकार को इलेक्ट्रॉनिक घटकों के स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने पर भी ध्यान केंद्रित करना होगा ताकि आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत किया जा सके।
5. तकनीकी संप्रभुता की दिशा में कदम:
* निर्भरता में कमी: मांग में गिरावट और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना भारत को तकनीकी रूप से अधिक संप्रभु बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
* सुरक्षा सुनिश्चित करना: यह सुनिश्चित करेगा कि महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां और डेटा राष्ट्रीय नियंत्रण में रहें।
6. उपभोक्ताओं के लिए अधिक विकल्प और बेहतर गुणवत्ता:
* प्रतिस्पर्धा का स्वस्थ स्तर: जब बाजार में विविधता बढ़ती है, तो यह अंततः उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाता है। सभी कंपनियों को बेहतर गुणवत्ता, अधिक नवीनता, और बेहतर ग्राहक सेवा प्रदान करने के लिए प्रतिस्पर्धा करनी होगी।
निष्कर्ष: \'घंटी\' सिर्फ चेतावनी नहीं, एक नए युग का आगाज़
चीनी स्मार्टफोन कंपनियों की भारत में पहली बार मांग में आई गिरावट एक साधारण बाजार उतार-चढ़ाव से कहीं अधिक है। यह एक ऐसे \'महायुद्ध\' की शुरुआत है जहाँ राष्ट्रीय हित, उपभोक्ता चेतना, और आत्मनिर्भरता की भावना ने विदेशी प्रभुत्व को चुनौती दी है। यह \'घंटी\' सिर्फ एक चेतावनी नहीं है; यह एक ऐसे नए युग का आगाज़ है जहाँ भारतीय स्मार्टफोन परिदृश्य अपनी दिशा स्वयं तय करेगा।
यह वह समय है जब भारतीय ब्रांडों को अपनी क्षमता साबित करने का मौका मिलेगा। यह वह समय है जब चीनी कंपनियों को अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करना होगा और यदि वे भारत में बने रहना चाहते हैं तो उन्हें स्थानीय जरूरतों और विश्वास को प्राथमिकता देनी होगी। और सबसे महत्वपूर्ण बात, यह वह समय है जब भारतीय उपभोक्ता खुद को सशक्त महसूस कर सकते हैं, यह जानते हुए कि उनकी पसंद का देश के भविष्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
भविष्य में, हम एक अधिक संतुलित और विविध स्मार्टफोन बाजार देख सकते हैं, जहाँ घरेलू ब्रांड मजबूत दावेदार होंगे, चीनी कंपनियां अपनी भूमिका को फिर से परिभाषित करेंगी, और Samsung और Apple जैसे वैश्विक खिलाड़ी अपनी-अपनी जगह बनाए रखेंगे। यह भारत की \'डिजिटल इंडिया\' यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है, जहाँ तकनीक केवल उपभोग की वस्तु नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्रगति और आत्मनिर्भरता का एक माध्यम बन जाएगी। इस \'महायुद्ध\' के परिणाम का इंतजार है, लेकिन एक बात निश्चित है: भारतीय स्मार्टफोन बाजार अब कभी पहले जैसा नहीं रहेगा।