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Cancer Drug Price Controversy: कैंसर की दवा की कीमत ₹2,700 और MRP ₹27,000! अस्पताल की फार्मेसी से दवा खरीदने को मजबूर करने पर भी SC सख्त

September 29, 2026 688 views 1 min read
Cancer Drug Price Controversy: कैंसर की दवा की कीमत ₹2,700 और MRP ₹27,000! अस्पताल की फार्मेसी से दवा खरीदने को मजबूर करने पर भी SC सख्त
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Cancer Drug Price Controversy: कैंसर की दवा की कीमत ₹2,700 और MRP ₹27,000! अस्पताल की फार्मेसी से दवा खरीदने को मजबूर करने पर भी SC सख्त


कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कीमतों में भारी अंतर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। हाल ही में, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने एक उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि जिस दवा की रिटेल कीमत करीब ₹2,700 है, उसकी अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) ₹27,000 रखी गई है। यह स्थिति न केवल मरीजों के लिए आर्थिक बोझ का कारण बन रही है, बल्कि यह स्वास्थ्य प्रणाली की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाती है।



दवा की कीमतों में असमानता का मुद्दा


सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए कहा कि दवाओं की कीमतों में इतना बड़ा अंतर किसी भी मरीज के लिए एक गंभीर समस्या हो सकता है। पीठ ने यह सवाल उठाया कि इतनी बड़ी राशि का फायदा आखिर किसे मिल रहा है और इसका बोझ मरीजों तथा टैक्सपेयर्स पर क्यों पड़ना चाहिए। 10 गुना अंतर को लेकर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है और इसे "दिवालियापन" और "दिवालियापन" की संज्ञा दी।



अस्पतालों की फार्मेसी से दवा खरीदने पर सवाल


कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि क्यों कुछ कॉर्पोरेट अस्पताल मरीजों को अपने अस्पताल की फार्मेसी या निर्धारित केमिस्ट से ही दवाएं खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। इस प्रकार की नीतियां मरीजों पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं, खासकर जब उन्हें बताया जाता है कि अस्पताल के बाहर से दवा खरीदने पर उन्हें इलाज की गारंटी नहीं मिलेगी। इस मामले में, केंद्र सरकार को निर्देश दिया गया कि वह इस व्यवस्था पर गौर करे और मरीजों के हितों की रक्षा के लिए उचित कदम उठाए।



सरकार की प्रतिक्रिया


केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मामले पर अधिकारियों के साथ चर्चा की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एक ऐसा संतुलन बनाने की आवश्यकता है जिसमें मरीजों, अस्पतालों और फार्मा सेक्टर के सभी संबंधित पक्षों के हितों का ध्यान रखा जा सके। तुषार मेहता ने कहा कि दवाओं की कीमतों से संबंधित मुद्दे को सुलझाने के लिए एक उचित नीति बनानी होगी जो सभी के लिए लाभकारी हो।



दवाओं की कीमतों का नियमन


यह मामला Drugs (Prices Control) Order, 2013 (DPCO) के तहत दवाओं की कीमतों के नियमन, जेनेरिक दवाओं के इस्तेमाल और मेडिकल डिवाइस की कीमतों से जुड़े सवालों वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान सामने आया। कोर्ट ने दवाओं पर एक समान 16 प्रतिशत मार्जिन रखने के विचार पर भी केंद्र का ध्यान आकर्षित किया।



रोगियों की सुरक्षा और अधिकार


सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि रोगियों के स्वास्थ्य और उनकी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए दवा की कीमतों का निर्धारण होना चाहिए। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि मरीजों को उनकी जरूरत की दवाएं उचित मूल्य पर उपलब्ध हों। यदि दवा की कीमतें इतनी अधिक हैं कि वे सामान्य मरीज के लिए पहुंच से बाहर हैं, तो यह स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की विफलता को दर्शाता है।



निष्कर्ष


कैंसर की दवा की कीमतों में इस प्रकार का असमानता केवल एक आर्थिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक नैतिक और सामाजिक समस्या भी है। सुप्रीम कोर्ट ने जो दिशा-निर्देश दिए हैं, वे न केवल मरीजों के हितों की रक्षा करेंगे, बल्कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने में भी सहायक होंगे। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई आवश्यक है ताकि मरीजों को उनकी जरूरत की दवाएं बिना किसी आर्थिक बोझ के मिल सकें।


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