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बिहार राष्ट्रीय औसत से आगे:महंगाई पर राहत : 26 राज्यों से सस्ता बिहार, गांव के मुकाबले शहर में रहना आसान

May 16, 2026 3,383 views 1 min read
बिहार राष्ट्रीय औसत से आगे:महंगाई पर राहत : 26 राज्यों से सस्ता बिहार, गांव के मुकाबले शहर में रहना आसान

बिहार राष्ट्रीय औसत से आगे:महंगाई पर राहत : 26 राज्यों से सस्ता बिहार, गांव के मुकाबले शहर में रहना आसान


देश का उपभोक्ता सूचकांक 105.12, जबकि बिहार का 104.01 देशभर में महंगाई की चर्चा आम है। लेकिन, बिहार से एक राहत भरी खबर है। अप्रैल महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़े जारी हो गए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि देश के 26 राज्यों की तुलना में बिहार में जीवन जीना ज्यादा आसान और सस्ता है। दैनिक जरूरत की चीजें राष्ट्रीय औसत से सस्ती मिल रही हैं। इस मामले में 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से केवल 9 ही बिहार से बेहतर स्थिति में हैं। बिहार का ताजा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 104.01 है। यह राष्ट्रीय सूचकांक 105.12 से कम है। इसे ऐसे समझें- जो सामान अप्रैल 2024 में 100 रुपए में मिलता था, उसके लिए बिहार में अब 104 रुपए 01 पैसे देने पड़ रहे हैं। वहीं, पूरे देश में इसके लिए औसतन 105 रुपए 12 पैसे चुकाने पड़ रहे हैं। बिहार इस मामले में मध्य प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल और पंजाब जैसे बड़े राज्यों से काफी बेहतर स्थिति में है। मुफ्त बिजली ने बचाई आम आदमी की जेब आंकड़े साफ बताते हैं कि आम जनता के बजट का एक बड़ा हिस्सा बिजली, पानी और घर पर खर्च होता है। बिहार में 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना ने सीधे आम आदमी की जेब को राहत दी है। इससे हाउसिंग और ईंधन की महंगाई दर -5.83% में चला गया है। स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी जरूरतें भी नियंत्रण में हैं। हालांकि, गांवों में महंगाई का शहरों से ज्यादा होना एक चिंता का विषय है। यह हमारी सप्लाई चेन की कमजोरी को दर्शाता है। अगर गांवों में स्थानीय उत्पादन बढ़ाया जाए और सप्लाई नेटवर्क सीधा किया जाए, तो ग्रामीण बिहार में भी महंगाई दर को शहरों के बराबर या उससे कम लाया जा सकता है। दिल्ली, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से सीख लेकर बिहार इस रैंकिंग में और भी सुधार कर सकता है। क्यों कम हुई महंगाई? जानिए कारण महंगाई घटने के पीछे सबसे बड़ा हाथ बिजली और हाउसिंग का है। हाउसिंग, वाटर सप्लाई, बिजली और गैस जैसे ईंधनों पर लागत पिछले साल की तुलना में 5.83 फीसदी कम हुआ है। इसका मुख्य कारण हर महीने 125 यूनिट घरेलू बिजली मुफ्त मिलना है। स्वास्थ्य सेवाएं केवल 1.93% महंगी हुईं। बिहार के गांव पर महंगाई की मार अधिक, शहर सस्ते सूचकांक का एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। बिहार में शहरों की तुलना में गांवों पर महंगाई की मार ज्यादा है। राज्य का ग्रामीण सूचकांक 104.17 है, जबकि शहरी सूचकांक महज 103.09 है। विशेषज्ञों के मुताबिक, गांवों में रोजमर्रा का सामान शहरों के सप्लाई चेन से पहुंचता है। महंगाई बढ़ने की रफ्तार में भी बिहार को राहत बिहार में महंगाई बढ़ने की रफ्तार (महंगाई दर) भी 26 राज्यों से कम है। अप्रैल में बिहार की महंगाई दर 2.74 फीसदी रही। यह राष्ट्रीय दर (3.48 फीसदी) से काफी कम है। पड़ोसी राज्य झारखंड का सूचकांक (103.78) बिहार से कम जरूर है, लेकिन वहां महंगाई बढ़ने की दर 2.88 फीसदी है।