Politics
धरना-प्रदर्शनों का नया कारोबार: लोकतंत्र की आड़ में आखिर किसके हित साधे जा रहे हैं?
October 10, 2026
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कश्मीरी पंडितों के विस्थापन और घाटी में हुए नरसंहारों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है. एक इंटरव्यू में कश्मीरी पंडित समुदाय के प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि 35 साल बीत जाने और नौ प्रधानमंत्रियों के बदलने के बावजूद न पीड़ितों को न्याय मिला, न मुआवजा और न ही सुरक्षित पुनर्वास की कोई ठोस नीति बनी. उन्होंने कहा कि चुनावों के दौरान कश्मीरी पंडितों का मुद्दा बार-बार उठाया जाता है, लेकिन सत्ता में आने के बाद सरकारें इस पर ठोस कदम नहीं उठातीं. उन्होंने दावा किया कि समुदाय आज भी खुद को उपेक्षित महसूस करता है और उनके मुद्दे का इस्तेमाल सिर्फ राजनीतिक बहस और चुनावी विमर्श तक सीमित रह गया है.